अस्मिता

हर कोई चाहता है कि उसकी भी कोई अपनी पहचान हो. आज के समाज में नारी के सन्दर्भ में यह बात और भी जरूरी हो जाती है. अस्मिता की तलाश में ही......

23 मार्च 2013

ਕਵਿਤਾ

ਕੀ ਦੱਸਾਂ ਮੈਂ ਕਿੰਵੇਂ ਲੰਘਾਈ 
ਰਾਤ ਦੁਖ ਭਰੀ ਲੰਮੀ।
ਦਿਲ ਦਾ ਕਤਰਾ-ਕਤਰਾ ਹੋਇਆ 
ਤੇ ਇਕ ਕਵਿਤਾ ਜੰਮੀ।

प्रस्तुतकर्ता - डॉ. पूनम गुप्त पर शनिवार, मार्च 23, 2013 2 टिप्‍पणियां:
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लेबल: काव्य, डॉ. पूनम गुप्त, ਕਵਿਤਾ
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डॉ. पूनम गुप्त
पटियाला, पंजाब, India
कविता, ग़ज़ल, लघुकथा लेखन में रूचि. प्रकाशित रचनाएं : (१) कल भी था और आज भी है --- (ग़ज़ल-संग्रह) (२) गुरु गोबिंद सिंह कृत 'कृष्णावतार' का सौंदर्य-दर्शन (शोध-प्रबंध )
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